Wednesday, 20 January 2021

हिंदी

 ये वो उर्दू के शब्द जो आप प्रतिदिन प्रयोग करते हैं, इन शब्दों को त्याग कर मातृभाषा का प्रयोग करें

       उर्दू                     हिंदी

01 ईमानदार       - निष्ठावान

02 इंतजार         - प्रतीक्षा

03 इत्तेफाक       - संयोग

04 सिर्फ            - केवल, मात्र

05 शहीद           - बलिदान

06 यकीन          - विश्वास, भरोसा

07 इस्तकबाल    - स्वागत

08 इस्तेमाल       - उपयोग, प्रयोग

09 किताब         - पुस्तक

10 मुल्क            - देश

11 कर्ज़             - ऋण

12 तारीफ़          - प्रशंसा

13 तारीख          - दिनांक, तिथि

14 इल्ज़ाम         - आरोप

15 गुनाह            - अपराध

16 शुक्रीया          - धन्यवाद, आभार

17 सलाम           - नमस्कार, प्रणाम

18 मशहूर           - प्रसिद्ध

19 अगर             - यदि

20 ऐतराज़          - आपत्ति

21 सियासत        - राजनीति

22 इंतकाम          - प्रतिशोध

23 इज्ज़त           - मान, प्रतिष्ठा

24 इलाका           - क्षेत्र

25 एहसान          - आभार, उपकार

26 अहसानफरामोश - कृतघ्न

27 मसला            - समस्या

28 इश्तेहार          - विज्ञापन

29 इम्तेहान          - परीक्षा

30 कुबूल             - स्वीकार

31 मजबूर            - विवश

32 मंजूरी             - स्वीकृति

33 इंतकाल          - मृत्यु, निधन 

34 बेइज्जती         - तिरस्कार

35 दस्तखत          - हस्ताक्षर

36 हैरानी              - आश्चर्य

37 कोशिश            - प्रयास, चेष्टा

38 किस्मत            - भाग्य

39 फै़सला             - निर्णय

40 हक                 - अधिकार

41 मुमकिन           - संभव

42 फर्ज़                - कर्तव्य

43 उम्र                  - आयु

44 साल                - वर्ष

45 शर्म                 - लज्जा

46 सवाल              - प्रश्न

47 जवाब              - उत्तर

48 जिम्मेदार          - उत्तरदायी

49 फतह               - विजय

50 धोखा               - छल

51 काबिल             - योग्य

52 करीब               - समीप, निकट

53 जिंदगी              - जीवन

54 हकीकत            - सत्य

55 झूठ                  - मिथ्या, असत्य

56 जल्दी                - शीघ्र

57 इनाम                - पुरस्कार

58 तोहफ़ा              - उपहार

59 इलाज               - उपचार

60 हुक्म                 - आदेश

61 शक                  - संदेह

62 ख्वाब                - स्वप्न

63 तब्दील              - परिवर्तित

64 कसूर                 - दोष

65 बेकसूर              - निर्दोष

66 कामयाब            - सफल

67 गुलाम                - दास

68 जन्नत                -स्वर्ग 

69 जहन्नुम             -नर्क

70 खौ़फ                -डर,भय

71 जश्न                  -उत्सव

72 मुबारक             -बधाई/शुभेच्छा

73 लिहाजा़            - इसलिए

74 निकाह             -विवाह/लग्न

75 आशिक            -प्रेमी 

76 माशुका             -प्रेमिका 

77 हकीम              -वैद्य

78 नवाब               -राजसाहब

79 रुह                  -आत्मा 

80 खु़दकुशी          -आत्महत्या 

81 इज़हार             -प्रकट , स्पष्ट

82 बादशाह           -राजा/महाराजा

83 ख़्वाहिश          -महत्वाकांक्षा, इच्छा, आकांशा

84 जिस्म             -शरीर/अंग

85 हैवान             -दैत्य/असुर

86 रहम              -दया

87 बेरहम            -निर्मम, निर्दयी

88 खा़रिज           -निरस्त

89 इस्तीफ़ा          -त्यागपत्र 

90 रोशनी            -प्रकाश 

91मसीहा             -देवदूत

92 पाक              -पवित्र

93 क़त्ल              -हत्या ,

94 कातिल           -हत्यारा,हन्ता

95 मुहैया             - उपलब्ध

96 फ़ीसदी           - प्रतिशत

97 कायल           - प्रशंसक

98 मुरीद             - भक्त

99 कींमत           - मूल्य (मुद्रा में)

100 वक्त            - समय

101 सुकून        - शाँति

102 आराम       - विश्राम

103 मशरूफ़    - व्यस्त

104 हसीन       - सुंदर, शोभित

105 कुदरत      - प्रकृति

106 करिश्मा    - चमत्कार

107 इजाद       - आविष्कार

108 ज़रूरत     - आवश्यकता

109 ज़रूर       - अवश्य

110 बेहद        - असीम, अत्यन्त

111 तहत       - अनुसार

112 दर्द   -  पीड़ा

इनके अतिरिक्त हम प्रतिदिन अनायास ही अनेक उर्दू शब्द प्रयोग में लेते हैं, कारण है ये बाॅलिवुड और मीडिया जो एक घिनौने षड़यंत्र के अनुसार हमारी मातृभाषा पर ग्रहण लगाते आ रहे हैं।

हिन्दी हमारी राजभाषा एवं मातृभाषा हैं इसका सम्मान करें, भाषा बचाईये, संस्कृति बचाईये।

अपर्णा पुरोहित

 ये है अपर्णा पुरोहित             

 भारत में अमेज़न प्राइम की कंटेंट हेड अपर्णा पुरोहित के खिलाफ भाजपा नेताओं ने आवाज़ उठाई है और कंपनी से उन्हें बरखास्त करने की माँग की है भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ स्क्रीनशॉट्स शेयर कर दावा किया कि वे वामपंथी झुकाव वाली हैं अपर्णा पुरोहित ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के खिलाफ भी पोस्ट शेयर किया था उसमें उन्हें ‘फ्रॉड’ बताया गया था

एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने CAA और NRC के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचार अभियान का भी साथ दिया था और वरुण ग्रोवर की कविता हम कागज़ नहीं दिखाएँगे को आगे बढ़ाया था उन्होंने लिखा था कि वरुण ग्रोवर ने इन शब्दों को काफी अच्छे से पिरोया है CAA विरोधी आंदोलन के दौरान वामपंथी मीडिया की खबरों को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था- यही है विकास का सच और मोदी सरकार पर कटाक्ष किया था

जामिया हिंसा मामले में भी उन्होंने हिंसा करने वाले कट्टर इस्लामी छात्रों का साथ दिया था भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक पत्र लिख कर ऑपइंडिया की खबर कंपनी के कंट्री हेड को भेजते हुए अमेज़न प्राइम पर चल रहे हिन्दू विरोधी कंटेंट्स को लेकर चिंता जताई थी इसमें उन्होंने लिखा था कि कैसे अपर्णा पुरोहित के अंतर्गत वीडियो प्लेटफॉर्म पर हिन्दू विरोधी कंटेंटस परोसे जा रहे हैं

इससे पहले पाताल लोक नामक एक सीरीज में जम कर हिन्दू विरोधी कंटेंट्स डाले गए थे उसमें भी देवी-देवताओं का अपमान मंदिर का अपमान और जातिवादी कंटेंट्स थे अपर्णा पुरोहित ही अमेज़न प्राइम की क्रिएटिव डेवलपमेंट टीम की हेड हैं साथ ही वो प्लेटफार्म की ओरिजिनल वेब टीम की इंचार्ज भी हैं अपर्णा पुरोहित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं उनका कहना है कि वे 15 वर्षों से फ़िल्में बनाने के काम में हैं

एक फेसबुक पोस्ट में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करते हुए उन्हें अपराधी की तरह दिखा चुकी हैं उन्होंने जेएनयू में हुई वामपंथी छात्रों की हिंसा के लिए पीएम मोदी और अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया था वो द वायर जैसे मीडिया पोर्टलों के लेख भी शेयर करती रहती हैं उन्होंने अरुंधति रॉय का वीडियो भी शेयर किया था वह स्वरा भास्कर जैसों का बचाव करते हुए भी नजर आई थीं उन्होंने CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान फेक न्यूज़ भी शेयर की थी

बता दें कि वेब सीरिज तांडव में हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाले दृश्यों तथा डायलॉग को लेकर मचे बवाल के बाद पूरे सनातनी हिन्दू गुस्से में है।

Wednesday, 13 January 2021

पंडित भरत व्यास

 बेटे के वियोग में गीत बनाया , बन गया प्रेमियों का सबसे अमर गाना :- 


साल था 1957 । फ़िल्म "जनम जनम के फेरे" रिलीज हुई। यह म्यूजिकल हिट साबित हुई । इस फ़िल्म के एक गाने "जरा सामने तो आओ छलिये" ने तो जैसे उस दौर में तहलका मचा दिया।  यह गाना इतना सुपरहिट साबित हुआ कि उस साल की 'बिनाका गीत माला" का यह नम्बर 1 गीत बन गया।


इस गाने का अनोखा किस्सा है । इस गाने को लिखा था पंडित भरत व्यास ने । तो हुआ यों था कि पंडित भरत व्यास जी के एक बेटा था श्याम सुंदर व्यास ! श्याम सुंदर बहुत संवेदनशील था। एके दिन भरत जी से किसी बात पर नाराज़ होकर बेटा श्याम सुंदर घर छोड़ कर चला गया।


भरत जी ने उसे लाख ढूंढा। रेडियो और अख़बार में विज्ञापन दिया। गली गली दीवारों पर पोस्टर चिपकाए। धरती, आकाश और पाताल सब एक कर दिया।ज्योतिषियों आदि से पूछा।  मज़ारों, गुरद्वारे, चर्च और मंदिरों में मत्था टेका। लेकिन वो नही मिला। ज़मीन खा गई या आसमां निगल गया। आख़िर हो कहां पुत्र? तेरी सारी इच्छाएं और हसरतें सर आंखों पर। तू लौट तो आ। बहुत निराश हो गए भरत व्यास।


उस समय भरत व्यास जी कैरियर के बेहतरीन दौर से गुज़र रहे थे। ऐसे में बेटे के अचानक चले जाने से ज़िंदगी ठहर सी गई। किसी काम में मन नहीं लगता। निराशा से भरे ऐसे दौर में एक निर्माता भरत जी से मिलने आया और उन्हें अपनी फिल्म में गाने लिखने के लिए निवेदन किया। भरत जी ने पुत्र वियोग में उस निर्माता को अपने घर से निकल जाने को कह दिया ।


लेकिन उसी समय भरत जी की धर्मपत्नी वहां आ गई ।उन्होंने उस निर्माता से क्षमा मांगते हुए यह निवेदन किया कि वह अगले दिन सुबह पुनः भरत जी से मिलने आए ।निर्माता मान गए। इसके पश्चात उनकी धर्मपत्नी में भरत जी से यह निवेदन किया की पुत्र की याद में ही सही उन्हें इस फिल्म के गीत अवश्य लिखना चाहिए । ना मालूम क्या हुआ कि पंडित भरत व्यास ने अपनी धर्मपत्नी कि इस आग्रह को स्वीकार करते हुए गाने लिखना स्वीकार कर लिया ।


उन्होंने गीत लिखा - "ज़रा सामने तो छलिये, छुप-छुप छलने में क्या राज़ है, यूँ छुप न सकेगा परमात्मा, मेरी आत्मा की यह आवाज़ है.… " । इसे 'जन्म जन्म के फेरे' (1957 ) फ़िल्म में शामिल किया गया। रफ़ी और लता जी ने इसे बड़ी तबियत से , दर्द भरे गले से गाया था। बहुत मशहूर हुआ यह गीत। लेकिन अफ़सोस कि बेटा फिर भी न लौटा। 


मगर व्यासजी ने हिम्मत नहीं हारी। फ़िल्म 'रानी रूपमती' (1959 ) में उन्होंने एक और दर्द भरा गीत लिखा - "आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं, मेरा सूना पड़ा संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं.…"।  इस गीत में भी बहुत दर्द था, और कशिश थी। इस बार व्यास जी की दुआ काम कर गई। बेटा घर लौट आया। 


लेकिन आश्चर्य देखिये कि वियोग के यह गाने उस दौर के युवा प्रेमियों के सर चढ़कर बोलते थे ।यह पंडित व्यास जी की कलम का ही जादू था ।


पंडित भरत व्यास राजस्थान के चुरू इलाके से 1943 में पहले पूना आये और फिर बंबई। बहुत संघर्ष किया। बेशुमार सुपर हिट गीत लिखे। हिंदी सिनेमा को उनकी देन का कोई मुक़ाबला नहीं। एक से बढ़ कर एक बढ़िया गीत उनकी कलम से निकले।


आधा है चंद्रमा रात आधी.… तू छुपी है कहां मैं तपड़ता यहां…(नवरंग)…निर्बल की लड़ाई भगवान से, यह कहानी है दिए और तूफ़ान की.… (तूफ़ान और दिया).…सारंगा तेरी याद में (सारंगा)…तुम गगन के चंद्रमा हो मैं धरा की धूल हूं.… (सती सावित्री)…ज्योत से ज्योत जलाते चलो.…(संत ज्ञानेश्वर)…हरी भरी वसुंधरा पे नीला नीला यह गगन, यह कौन चित्रकार है.…(बूँद जो बन गई मोती)…ऐ मालिक तेरे बंदे हम.…सैयां झूठों का बड़ा सरताज़ निकला…(दो आंखें बारह हाथ)…दीप जल रहा मगर रोशनी कहां…(अंधेर नगरी चौपट राजा)…दिल का खिलौना हाय टूट गया.…कह दो कोई न करे यहां प्यार …तेरे सुर और मेरे गीत.…(गूँज उठी शहनाई)…क़ैद में है बुलबुल, सैय्याद मुस्कुराये…(बेदर्द ज़माना क्या जाने?) आदि। यह अमर नग्मे आज भी गुनगुनाए जाते हैं। गोल्डन इरा के शौकीनों के अल्बम इन गानों के बिना अधूरे हैं। 


व्यास जी का यह गीत - ऐ मालिक तेरे बंदे हम.…महाराष्ट्र के कई स्कूलों में सालों तक सुबह की प्रार्थना सभाओं का गीत बना रहा।पचास का दशक भरत व्यास के फ़िल्मी जीवन का सर्वश्रेष्ठ दौर था। 


आज यह सारी बातें इसलिए क्योंकि परसों यानी 6 जनवरी को भरत व्यासजी का जन्म दिवस था । पंडित भरत व्यास जी का जन्म 6 जनवरी, 1918 को बीकानेर में हुआ था। वे जाति से पुष्करना ब्राह्मण थे। वे मूल रूप से चूरू के थे।  बचपन से ही इनमें कवि प्रतिभा देखने लगी थी ।  मजबूत कद काठी के धनी भरत व्यास डूंगर कॉलेज बीकानेर में अध्ययन के दौरान वॉलीबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके थे।


 नमन।।


भारत का सबसे बड़ा अमीर कौन?

भारत का सबसे बड़ा अमीर कौन? मुकेश अम्बानी या रतन टाटा? शरद पवार या चिदम्बरम? सोनिया गांधी या रॉबर्ट वाड्रा? 

अधिकतर लोग कहेंगे कि मुकेश अम्बानी भारत का सबसे बड़ा धनी है- सबसे अधिक रईस है. कुछ हद तक यह बात सही भी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुकेश अम्बानी की अधिकतर संपत्ति रिलायंस ग्रुप की अलग अलग कम्पनियों के शेयर के रूप में ही हैं.  अगर मुकेश अम्बानी अपनी पूरी शेयर होल्डिंग  बेचकर नकद के रूप में इकठ्ठा करना चाहे -तो इतनी बड़ी मात्रा में उन कम्पनियों के शेयर बिकने के कारण सभी शेयर 30-40-50 प्रतिशत तक लगातार गिरते चले जायेंगे, और वर्तमान में करीब 80 बिलियन डॉलर का मालिक कहलाता मुकेश भी केवल 25-30-35 बिलियन डॉलर से अधिक ( नकद में) का मालिक नहीं हो सकता.

अब सीधे आते हैं सर रॉबर्ट वाड्रा जी पर. 

Celebritynetworth वेबसाइट के अनुसार सर वाड्रा ने मैडम प्रियंका से शादी के बाद अगले कुछ ही वर्षों में लगभग 2.1 बिलियन डॉलर की संपत्ति का मालिकाना हक पाया है. मजे की बात यह है कि सर वाड्रा की अधिकतर संपत्ति पहले से ही बहुत लाभ में चल रहे विभिन्न बडे व्यापारों में 10% से 30-40% तक की साझेदारी खरीदी है. यह 2.1 बिलियन डॉलर की संपत्ति का मालिकाना हक पाने के लिये सर वाड्रा ने कितने रुपये उन कम्पनियों के मालिकों को दिये या कितने रुपये पिछले वर्षों में इंकम टैक्स आदि के रूप में सरकार को दिये -यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन इससे यह अवश्य पता चलता है कि केवल मैडम प्रियंका से शादी करने के बाद ही सर वाड्रा कुछ ही वर्षों में डॉलर में बिलियनेयर अवश्य बन गये.

मैं सोच नहीं पा रहा हूँ कि अगर सर वाड्रा केवल 10-15 वर्षों में खरबपति बन सकते हैं तो अनेक बार केन्द्र सरकार में गृहमंत्री, वित्तमंत्री जैसे अति महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके शरद पवार व पी चिदम्बरम कितने अमीर होंगे. शायद ये दोनों ही अलग अलग मुकेश अम्बानी से भी अधिक अमीर हो सकते हैं.

फिर सोचने लगता हूं कि सर वाड्रा अगर 2.1 बिलियन डॉलर के मालिक हैं तो स्वयं कांग्रेस अध्यक्षा मैडम सोनिया जी -जो 2004 से 2014 तक लगातार 10 वर्ष तक देश की सुपर प्रधानमंत्री रही थीं -वह स्वयं कितनी अमीर होंगी. नेशनल हैराल्ड या इसी तरह की छोटी मोटी बातों की मैं चर्चा भी नहीं करना चाहता. पर निश्चित रूप से मैं मानता हूँ कि मैडम सोनिया गांधी ही इस देश की सबसे अमीर महिला हैं और अब समय आ गया है कि हम सभी भारतीय उनको इस बात के लिये पूरा सम्मान दें और हमारे स्कूलों में सभी पुस्तकों में देश के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में मुकेश अम्बानी की जगह मैडम सोनिया गांधी का नाम ही होना चाहिए.

और दिल्ली में आंदोलन कर रहे लोग सोचते हैं कि अम्बानी अडानी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं. अरे भोले भाले किसानों, तुम्हारी जमीनों पर अम्बानी अडानी कब्जा नहीं करने वाले, तुम्हारी जमीनों पर कब्जा करने वाले तो शरद पवार, पी चिदम्बरम, सर वाड्रा और मैडम सोनिया जैसे लोग हैं. पर दुर्भाग्य से तुम लोगों ने मोदी विरोध की काली पट्टी अपनी आंखों पर बांध रखी है-इसलिये तुम सच्चाई देखना ही नहीं चाहते हो.

मैं स्वयं किसान हूं, पर कृषि कानूनों का समर्थन करता हूँ, मैं इस किसान (??) आंदोलन का विरोध करता हूँ.

https://www.celebritynetworth.com/richest-businessmen/richest-billionaires/robert-vadra-net-worth/?amp=1

भारत में राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष

 भारत में राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष...


कांग्रेस - सोनिया का बेटा

शिवसेना - उद्धव ठाकरे का बेटा

NCP - पवार की बेटी

RJD - लालू का बेटा

SP - मुलायम का बेटा 

JDS - देवेगौड़ा का बेटा 

TMC - ममता का भतीजा 

BSP - मायावती का भतीजा

TRS - चंद्रशेखर राव का बेटा

TDP - चंद्रबाबू नायडू का बेटा

Akali Dal - बादल का बेटा

National Conf - फारुख अब्दुल्ला का बेटा

PDP - मुफ़्ती की बेटी

YSRCP -  राजशेखर रेड्डी का बेटा

BJD - बीजू पटनायक का बेटा

LJP - रामविलास पासवान का बेटा

JMM - शिबू सोरेन का बेटा

RLD - अजित सिंह का बेटा

JDS -  देवेगौड़ा का बेटा

INLD - चौटाला का बेटा

DMK - स्टालिन का बेटा

BJP - पता नहीं किसका बेटा,


आज भारत में यही पार्टी है , जिस में *परिवारवाद नहीं चलता ,,

 *लोकतंत्र चलता है , राजतंत्र नहीं चलता । 

Tuesday, 12 January 2021

दिलीप आप्टे जी कi लेख

दिलीप आप्टे जी के एक आलेख से इस एंगल पर रोशनी पड़ी कि #किसानबिल के नए फार्म रिफॉर्म की जड़ क्या है और राजनेता इससे क्यों चिंतित हैं? इसे सही ढंग से समझने के लिए इस विश्लेषण को पढ़ें।

नई प्रणाली में, #कृषिउपज के व्यापारियों को #केंद्रीय_प्राधिकरण के साथ अपने PAN के साथ उन्हें पंजीकृत करना होगा।

प्रथम स्तर का लेनदेन जो (किसान और व्यापारी के बीच) जीएसटी प्रणाली के दायरे से बाहर है।

धीरे-धीरे, आगे कृषि व्यापार (हालांकि पंजीकृत व्यापारियों) को जीएसटी प्रणाली में लाया जाएगा। नतीजतन, कृषि उपज की बिक्री और आय सरकार के रिकॉर्ड में मिल जाएगी।

GAME यहाँ से शुरू होगा। किसान तो हमेशा आयकर और जीएसटी प्रणाली से मुक्त रहेंगे। लेकिन जो ट्रेडर्स इन #एग्रीकल्चर प्रोडक्ट को अप-स्ट्रीम बेचते हैं उन्हे जीएसटी और इनकम टैक्स के दायरे  में लाया जाएगा

इसे यहाँ समझने के लिए एक उदाहरण है। अगर #सुप्रियासुले और #चिदंबरम को अपने अंगूर और गोभी को व्यापारियों को क्रमशः 500 करोड़ रुपये में बेचना है, तो उन्हें आयकर से छूट रहेगी, लेकिन उन्हें अपने #आईटीआर में जिस व्यापारी  को माल बेच उसके #PAN को उद्धृत करना होगा।

ट्रेडर को अप-स्ट्रीम में माल को बेचकर अपनी आय पर 500 करोड़ रुपये और #आयकर पर जीएसटी का भुगतान करना होगा।

कल्पना कीजिए कि यदि कोई अंगूर और कोई गोभी है ही नहीं  (सिर्फ भरष्टाचार का पैसा है)तो  स्वाभाविक रूप से, व्यापारी सुप्रिया सुले या चिदंबरम से जीएसटी और आयकर वसूल करेगा!

इसलिए, सभी सुले,सभी चिदंबरम,सभी भृष्ट नेताओं को, जो कमीशन एजेंट और दलाल हैं, उन्हें अपनी कृषि आय दिखाने के लिए अब एक बड़ी रकम का भुगतान इनकम टैक्स और GST के रूप में भुगतना होगा। ये रकम करोड़ों में नही बल्कि अरबों में है

ईमानदार किसान, जिनके पास वास्तव में कृषि उपज थी, वे इस दायरे  से मुक्त रहेंगे।

यही इस मामले कि #जड़ है। इसलिए सारे भिर्ष्टाचारी बिलबिला रहे हैं, यदि ये बिल रहा तो उनके भृष्टाचार से कमाए ख़ज़ाने में छेद हो जायेगा।

पंजाब और महाराष्ट्र में कृषिगत भृष्टाचार सबसे ज्यादा है, साथ ही वाड्रा के साम्रज्य का बड़ा हिस्सा हरियाणा में है तो विरोध वहीं से आ रहा है!

यदि कल को अम्बानी अडानी इन किसानों से माल खरीदते भी हैं तो उन्हें उस खरीद पर सरकार को GST और टैक्स देना होगा जो अब तक टैक्स से बचा हुआ था।

अब आप समझ सकते हैं कि सारे #विपक्षी राजनेता #आंदोलनकारियों की भीड़ इकट्ठा करने में इतना भारी धन क्यों खर्च कर रहे हैं।

अगर भारत से भरष्टाचार का चूल मूल खत्म करना है तो सही बिलों के पीछे छुपी #राष्ट्र_निर्माण की मंशा को समझना होगा और समर्थन करना होगा


भारत विरोधी गैंग

 चीन और पाकिस्तान के हमले के खिलाफ तैयार भारत की सेना की कमर को रेल, सड़क और संचार व्यवस्था ध्वस्त कर के पहले ही तोड़ देने की इस देशद्रोही साजिश को जानिए समझिए...

ध्यान से पढ़िए...

देश और दिल्ली से जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाले सड़क व रेल मार्ग को तथाकथित किसान आंदोलन की आड़ में जाम कर के बैठे गुंडे कोई किसान नहीं बल्कि भारत विरोधी गैंग के गुंडे और दलाल हैं.

लेह लद्दाख कश्मीर में तैनात लाखों भारतीय सैनिकों की रसद, दवाइयां और उन तक गोला बारूद हथियार की सप्लाई पिछले एक महीने से रेल-सड़क मार्ग जाम कर के इन देशद्रोही गुंडों ने रोक रखी है.

सरकार फ़िलहाल हवाई जहाज से फौजियों तक यह सामान पहुंचा रही है. लेकिन यह व्यवस्था काम चलाऊ है. सीमा पर तैनात लाखों सैनिकों के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. लेकिन इन देशद्रोही गुंडों ने अब जियो के लगभग डेढ़ हजार मोबाइल टॉवर ध्वस्त कर दिए हैं और आगे करते जा रहे हैं. यह एक भयानक साजिश है जिसके तहत पाकिस्तान से लगी सीमा वाले पंजाब में संचार व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है. पंजाब की कांग्रेसी सरकार इसे खुला समर्थन कर रही है.

भारतीय सेना की रेल-सड़क सम्पर्क और संचार व्यवस्था को पूरी तरह काट कर चीन और पाकिस्तान की तरफ से होने वाले किसी भी हमले की स्थिति में भारतीय सेना को पूरी तरह लाचार और लचर स्थिति में पहुंचा देने की भयानक तैयारी कर रहे हैं ये देशद्रोही गुंडे. क्योंकि नए कृषि कानून और किसान आंदोलन से भारतीय सेना के जवानों या जियो की मोबाइल फोन सर्विस का किसी भी प्रकार का कोई लेना-देना दूर दूर तक नहीं है.

कृपया ये सन्देश देश के हर नागरिक तक पहुंचाने में अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य झोंक दीजिए. वर्ना बहुत गम्भीर और भयानक परिणाम देश को भोगने पड़ेंगे.

इन देशद्रोही गुंडों को खुलकर अपना समर्थन और सहयोग दे रहे राजनीतिक गिरोहों के इस देशघाती चरित्र और चेहरे के खिलाफ जनता को खुलकर जागरूक करिए.

इन देशद्रोही गुंडों द्वारा मीडिया विशेषकर न्यूजचैनलों के साथ मिलकर किसानों के नाम पर बिछाए गए इस भारत विरोधी इमोशनल ब्लैकमेल के जाल को काटने में लगी हुई है. इसमें हमारा आपका योगदान भी अब बहुत जरूरी हो गया है.

किसानों का आदोलंन को राजनीतिक पार्टीयाओ के द्वारा उग्र बनाया जा रहा है।जिसमें मुख्य विरोधी घटक दल आम आदमी पार्टी,कांग्रेस,वामपंथी Communist, व कुछ किसान संगठन जो इन राजनीतिक पार्टियों से जुड़ी है,शामिल है।किसानों का आंदोलन फार्म ला से भटकर अब देश विरोधी तत्वो द्वारा हाई जैक कर लिया गया है

इस आदोलंन को चलाने की धूरि पंजाब से है।हरियाणा,उत्तर प्रदेश के पश्चिम भाग व राजस्थान के कुछ किसान शामिल है।पहले किसान संगठनो की माँग सिर्फ फार्म ला को हटाने तक सीमित थी।लेकिन अब यह भारतीय उद्योगपतिओ खासकर अंबानी,अडानी व बाबा रामदेव के Product का बहिष्कार करने पर केंद्रित हो गयी हैं।ध्यान रहे भारत में चल रहे मुस्लिम उधोगपतियो व विदेशी कंपनियाँ जैसे नेसले,कोकाकोला जो पंजाब में चल रही है उनके सामान का बहिष्कार करने की कोई माँग नही की गयी हैं। जीयो के 1500 मोबाइल टावरो को किसानों के बीच छिपे अराजकता फैलाने वाले तत्वो ने भारी नुकसान पहुँचाया है।कारण समझो।जो Communist बिचारधारा के नेता जैसे सीताराम यचूरी व कांग्रेस के मोदी विरोधी तत्वो की चाल है कि भारतीय सामान का बहिष्कार करवाकर चीन का सामान भारत में बिकता रहे।चीन के साथ बारडर पर चल रही तनातनी के बीच ऐ Anti national elements चाईना की मदद से इस आंदोलन को धार दे रहे हैं।फार्म ला तो बहाना है इनका असली मकसद भारत को आर्थिक रूप से कंगाल करना हैं।कनाडा से भी वहाँ के पंजावियो द्वारा इस आंदोलन को चलाने के लिए फंडिग दी जा रही है।मोदी जी के द्वारा आत्मनिर्भर भारत के कारण आज हमारे भारतीय उधोगपति भारत में ही सामान बना रहे हैं।जो पहले चीन व बाकी देशों से आता था।चीनी सामान का भारतीयों ने बहिष्कार कर दिया जिससे चाईना की आर्थिक खुशहाली की रीड की हड्डी टूट गयी हैं।इसीलिए चीन बोखलाया हुआ है।याद करे कैसे राहूल गाँधी 2008 में चीन से बयापारिक समझोता करके आऐ थे।व कयी बार चीन के राजदूत को मिलकर आऐ।जबकि वह केंद्रीय मंत्रीमंडल में भी नही है।बल्कि हारी हुई कांग्रेस पार्टी का सिर्फ़ सांसद है।चीन से आयात बंद होने के बाद मोदी जी ने Vocal For Local का करोनाकाल में नारा दिया।उसका असर यह हुआ कि चीन से आने वाला सामान आज भारत में बन रहा है।लाखों लोगों को आज भारत में रोजगार मिल रहा हैं।देश का पैसा देश के काम आ रहा है।चीन से आयातित सामान जैसे Ventilators, PP Kits, Sanitizer, Face Mask व कच्चा माल आदि सभी सामान भारत में तैयार हो रहा है।भारत के इस इतिहासिक कदम से चीन की आर्थिक आय धराशायी हो गयी हैं।इसीलिए जो Communist व बामपंथी थे व जिनकी चीन आर्थिक रूप से मदद करता था तो ऐसे Anti national elements की राजनीतिक दुकान भी बंद हो गयी।इसीलिए ऐ देश विरोधी ताकते मोदी जी का विरोध कर रही है।जनता को आगे आकर मोदी जी का समर्थन करना चाहिए।याद करो 2014 से पहले देश में बड़े बड़े घोटाले हुए।देश का पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम भी भारी आर्थिक घोटाले व भ्रष्टाचार में सम्मिलित होने के कारण 105 दिन तिहाड जैल में रहा व अभी जमानत पर है।पंजाब में भी खालीसतान परसती ताकते पाकिस्तान की सह पर इस आंदोलन को हर प्रकार की आर्थिक मदद दे रही है।असली किसान तो खैतो में काम कर रहा है।अगर सही किसान आदोलंन में होते तो आज मार्केट में फल व शबजीयो का अकाल पड जाता।खैर अफवाहो से सावधान रहे।व झूठी अफवाहो को सुनकर भ्रमित न हो।अपना जनाधार खिसकता देखकर व अगले साल राज्यो में होने वाले चुनावो को देखकर विरोधी राजनीतिक पार्टियों के चलाऐ जा रहे  कुचक्रो से बचे।नुकसान तो आम जनता का हो रहा है।मोदी जी का समर्थन करे।भारत की एकता बनाऐ रखे।तभी हमारा देश विकाशसील देशों की पंक्ति में खड़ा होगा।