Saturday, 21 November 2020

गुपकार

 क्या है गुपकार गैंग?:

श्रीनगर में एक बेहद वीआईपी रोड है जिसे गुपकार रोड कहते हैं। इसी रोड पर कश्मीर के तमाम पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले हैं गोल्फ कोर्स है गुपकार रोड पर फारुखअब्दुल्ला, उमरअब्दुल्ला, गुलामनबीआजाद, डॉक्टरकरणसिंह, महबूबामुफ्ती, अब्दुलगनी लोन सहित तमाम कश्मीरी नेताओं के बड़े-बड़े और आलीशान बंगले हैं और यह बंगले सरकारी है जिस पर इन्होंने कब्जा किया हुआ है। इन्होंने अपना एक संगठन बनाया जिसे गुपकार ग्रुप कहते हैं और यह अब कश्मीर में मिलकर चुनाव लड़ेंगे। यानी कश्मीर में अब कांग्रेस, नेशनलकान्फ्रेंस, और पीडीपी मिलकर चुनाव लड़ेगी और इन्होंने अपने गुपकारगैंग का जो घोषणापत्र बाहर किया है उसमें पहला लाइन यह है कि किसी भी तरह से धारा 370 और 35a को बहाल करना, चाहे उसके लिए चीन और पाकिस्तान की मदद क्यों न लेनी पड़े। सोचिए जो राहुलगांधी चीन के मुद्दे पर मोदी और मोदी सरकार पर हमला करता है उसी राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी कश्मीर में 370 और 35a फिर से लगाने के लिए चीन से मदद मांग रही है। 

Thursday, 19 November 2020

रोशनी एक्ट

भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर का रोशनी एक्ट खत्म कर दिय। सोचिए आज तक किसी मीडिया ने हम लोगों को रोशनी एक्ट के बारे में बताया ही नही। यह रोशनी एक्ट कश्मीर छोड़कर भाग गए हिंदुओं के मकान दुकान और जमीन और खेत मुस्लिमो को देने का फारुख अब्दुल्ला द्वारा बनाया गया एक  षड्यंत्र था जिसमें कांग्रेसी भी शामिल थी। 1990 के दशक में जितने भी हिंदू कश्मीर से भागे उन्हें पाकिस्तान के मुसलमानों ने मार कर नहीं भगाया बल्कि उनके ही पड़ोसी जिनके साथ वह बचपन में सेवई खाते थे त्यौहार मनाते थे चाय पीते थे उन्हीं पड़ोसियों अब्दुल असलम गफ्फार ने मार मार कर भगाया। उसके बाद जब पूरा कश्मीर घाटी हिंदुओं से खाली हो गया तब फारुख अब्दुल्ला के पास कुछ मुस्लिम गए और बोले कि हिंदुओं के इन मकानों दुकानों जमीनों खेतों खलिहानो को मुसलमानों को देने के लिए आप कुछ नियम बनाइए। तब फारुख अब्दुल्ला ने एक रोशनी एक्ट बनाया और इस रोशनी एक्ट के द्वारा सिर्फ ₹101 में किसी भी हिंदू की जमीन खेत मकान या दुकान एक मुसलमान की हो जाती थी। शगुफा यह छोड़ा गया कि मुसलमानों के घरों के आसपास के घर जो हिंदुओं के थे वह नहीं है बिजली का कनेक्शन काट देने की वजह से उनके आसपास अंधेरा रहता है जिससे उनके लिए खतरा हो सकता है इसलिए ऐसे घरों को रोशन करना जरूरी है। 

इस तरह रोशनी एक्ट का ताना-बाना बना

चुकी हिंदू जब अपना सब कुछ छोड़ कर भाग गए तब बिजली का बिल नहीं चुका पाने की वजह से उनके खेतों के ट्यूबेल का या दुकानों का या घर का बिजली का कनेक्शन काट दिया गया.... फिर फारुख अब्दुल्ला ने एक रोशनी एक्ट बनाया जिसके द्वारा मात्र ₹101 फीस भरकर कोई भी मुसलमान अपने नाम से उस हिंदू के खेत खलिहान मकान दुकान के लिए बिजली का कनेक्शन लेने का आवेदन भर सकता था। इस तरह पहले उस मुसलमान के नाम बिजली का बिल जनरेट कर दिया जाता था उसके बाद कुछ ही सालों में उस वक्त हिंदू की मकान दुकान या खेत का पूरा मालिकाना हक उस मुसलमान को दे दिया गया। इस तरह इस जालिमाना रोशनी एक्ट द्वारा फारुख अब्दुल्ला ने कश्मीर घाटी के हजारों हिंदुओं की बेशकीमती प्रॉपर्टी मुसलमानों को मात्र 101  रुपये।में दे दी। 

सबसे आश्चर्य की भारत की वामपंथी मीडिया कभी इस रोशनी एक्ट की चर्चा नहीं की। 

जम्मू काश्मीर में "रोशनी विधेयक" रद्द!

खेल देखिये, हिन्दुओं, कैसे अब्दुल  ने पड़ोसी हिन्दू को मार-भगाकर उसकी जमीन, मकान पर कब्जा जमा लिया १९९० में, फिर कब्जाई जमीन उस कथित शांतिदूतों के नाम करने का षड्यंत्र रचा गया। बिजली कनेक्शन देने की आड़ लेकर एक "रोशनी एक्ट" बनाया फारुख अब्दुल्ला सरकार ने। कब्जाई हिन्दूभूमि को मुस्लिम के नाम करने की फीस रखी गई मात्र १०१ रुपए। १०१ रुपये जमा करने मात्र से राशि जमा करने वाले के नाम वो जमीन का मालिकाना हक "रोशनी एक्ट" के अंतरगत पट्टा जारी कर दिया जाता, और फिर उस पर बिजली कनेक्शन देकर उस हिन्दूभूमि को सदा के लिए मुसलमान के नाम कर दिया गया।  

खेल बहुत गहरा खेला गया फारुख अब्दुल्ला द्वारा। 

१९९० की कत्ल वाली रात के पस्चात, जो जमीन जिसके कब्जे में थी, उसे "रोशनी एक्ट" द्वारा उसका मालिक बनाने का कानून फारुख अब्दुल्ला ने बनाया। 

१९९० के बाद से मुसलमानों के नाम की गई हिन्दूभूमि के कागजात, जो कि "रोशनी एक्ट" द्वारा जारी किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाएगा, और उसके असली स्वामी हिन्दू को ढूंढा जाएगा। 

जम्मू-काश्मीर में हिन्दुओ के अच्छे दिनों को आरंभ करता  नरेंद्र मोदी। 

*इंच इंच हिन्दूभूमि पुनः काश्मीरी हिन्दुओं को दिलाने के लिए संघर्ष करता हिन्दुराज। 

हिन्दू पंडितों को मार-भगाकर काश्मीर में मुस्लिमों द्वारा कब्जा की गई हिन्दूभूमि को मात्र ₹१०१ में मुसलमानों के नाम करने के लिए फारुख अब्दुल्ला के द्वारा बनाये गए "रोशनी एक्ट" को हिन्दुराजा नरेंद्र मोदी ने रद्द कर दिया है। 

साथ ही २००१ में काश्मीर में मुस्लिम नेताओं व उनके रिश्तेदारों के नाम बंदरबांट द्वारा "रोशनी एक्ट" द्वारा कब्जाई हिन्दूभूमि के सारे रिकॉर्ड को भी खंगालने के आदेश जारी किए गए हैं। 

भागते हिन्दुओं के बंगले, कोठियां, कारखाने, उद्योग, बाग बगीचे, केशर के बागान मुसलमानों ने कब्जा कर लिए थे। उन हिन्दूभूमि को आतंकी मुस्लिमों व उनके रिश्तेदारों के नाम करने के लिए "रोशनी एक्ट", जो कि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति के लिए तैयार किया गया था, उसकी आड़ में बिजली कनेक्शन देने के लिए केवल ₹१०१ में कब्जा जमीनों व बागानों, बंगलों, अन्य हिन्दूभूमि को मुस्लिमों के नाम पर पट्टा जारी कर दिया गया। काश्मीर को हिन्दुविहीन करने के षड्यंत्र में फारुख अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती दोनों के पिता की मुख्य भूमिकायें थी। इन्होंने भी अकूत हिन्दूभूमि अपने व अपने रिश्तेदारों के नाम "रोशनी एक्ट" द्वारा पट्टा जारी करते हुए कब्जाई। अब हिन्दुराजा नरेन्द्र मोदी के आदेशों से "रोशनी एक्ट" रद्द कर दिया गया है, और १९९० के बाद में जो भी सम्पति मुसलमानों के नाम की गई थी, सब की जांच आऱभ करने का मार्ग खोल दिया है। हिन्दुराजा नरेन्द्र मोदी इसालमिक आतंकवाद की असली जड़ पर चोट कर दिए हैं। 

इसी काश्मीर से "संविधान" की आड़ लेकर, हिन्दुओं के विरुद्ध आधुनिक "गजवा-ए-हिन्द" का षड्यंत्र फारुख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सैयद के द्वारा आरंभ किया गया था! जिसको "रोशनी एक्ट" बनाकर, काश्मीर में से हिन्दुविहीन करने का सफल षड्यंत्र रचा! राजनीतिक आतंकवादियों के बूरे दिन आरंभ हुए हैं। 

हिन्दुओं, शीघ्रपतन के शिकार हो कर, नरेन्द्र मोदी को मत कोसो। वो अखण्ड भारत के लक्ष्य को लेकर, चाणक्य नीति के आधार पर, राजधर्म निभा रहे हैं। मगर कुछ मूर्खों को तो स्वयं के जागरूक नागरिक होने का सार्वजनिक प्रमाण पत्र लेने की इतनी हड़बड़ाहट लगी रहती है, कि देश में कहीं पर भी किसी सेकुलर हिन्दू के साथ कुछ घटना घटित हुई नहीं, कि लग गए मोदी को गालियां देने। तरह तरह के सुझावों की झड़ी लगा देते हैं, कि मोदी तो विश्वास जीतने में लग गया है, मोदी ने तो हिन्दुओं के लिए क्या किया है? ऐसे शीघ्रपतन के शिकार अत्यंत बुद्धिजीवी वर्ग के तथाकथित जागरूक हिन्दुओं को कहना चाहता हूँ कि ७२ वर्षों में जितना षड्यंत्र हिन्दुओं के विरुद्ध कांग्रेस के ईसाई व मुस्लिम नेतृत्व ने किया है, उसकी सटीक जानकारी आपको नहीं है। आप केवल बरसाती मेंढकों की तरह टर्र टर्र करके मोदी-विरोधी गद्दारों के लिए वातावरण बनाने का अनसमझा पाप ही कर रहे हो। अगर आपको ये लगता है कि मोदी के अच्छे निर्णयों पर कुछ लिखने मात्र से आपके पाप क्षीण हो गए हैं, तो  ये आपकी मूर्खता ही है। बुद्धिमान व्यक्ति के तमगे लगाए आप लोग असल में जागते हिन्दुओं को पथभ्रष्ट करने का अनदेखा पाप कर रहे हो। 

राजनीतिक धर्म युद्ध में कोई निष्पक्ष नहीं होता। करोड़ों ग़द्दार मोदी के विरोध में हैं, और करोड़ों हिन्दू मोदी के पक्ष में। 

अब आप ही तय करिए कि आप किस पक्ष के साथ हो। आपके व्यवहार से किसे अधिक लाभ होता है? मोदी को या विपक्ष को?

स्वयं आंकलन करिए व अपनी कलम की दिशा धर्मरक्षार्थ गुप्त व दृश्यतामक निर्णय लेने वाले नरेंद्र मोदी के पक्ष में शाब्दिक करे मोदी-विरोधी पृष्ठभूमि के भंवरजाल में फंसे हिन्दुओं को बाहर निकल आने में साक्षी बनें। 


साभार:  हिन्दु धर्म ध्वजा वाहक



जवाहरलाल नेहरू

 3 पूर्व भारतीय प्रधानमंत्रियों पर प्रश्नोत्तर।


Q1: थुसु रहमान बाई नाम से महिला कौन है ?

Ans: पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की माँ।


Q2: जवाहरलाल नेहरू के पिता कौन हैं ?

Ans: श्री मुबारक अली


Q3: मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू के बीच क्या संबंध है ?

Ans: मुबारक अली की मृत्यु के बाद मोतीलाल नेहरू, थुसु रहमान बाई के दूसरे पति हैं। मोतीलाल मुबारक अली के कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था और वह उसके लिए दूसरी पत्नी है। तो मोतीलाल नेहरू जवाहरलाल नेहरू के सौतेले पिता हैं।


Q4: क्या जवाहरलाल नेहरू कश्मीरी पंडित जन्म से हैं ?

Ans: नहीं, पिता और माता दोनों ही मुसलमान हैं।


Q5: क्या जवाहरलाल नेहरू अपने सौतेले पिता की वजह से अपना हिन्दू नाम रखे हुए थे ?

Ans: हाँ, क्योंकि ये नाम एक पर्दा था। लेकिन मोतीलाल भी खुद कश्मीर पंडित नहीं हैं।


Q6: मोतीलाल के पिता कौन हैं और पंडित उनके नाम के साथ कैसे जुड़ गए ?

Ans: मोतीलाल के पिता जमुना नहर (नेहर) के ग़यासुद्दीन गाज़ी हैं जो 1857 के विद्रोह के बाद दिल्ली भाग गए और फिर कश्मीर चले गए। वहाँ उन्होंने अपना नाम गंगाधर नेहरू में बदलने का फैसला किया ('नहर/नेहर' 'नेहरू' बन गए) और "पंडित" को इस नाम के सामने इसलिए रखा कि वे लोगों को अपनी जाति पूछने का कोई मौका न दे। अपने सिर पर टोपी (टोपी) के साथ पंडित गंगाधर नेहरू इलाहाबाद चले गए। उनके बेटे मोतीलाल ने लॉ की डिग्री पूरी की और लॉ फर्म के लिए काम करना शुरू किया।


Q7: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के माता-पिता कौन हैं ?

Ans: जवाहरलाल नेहरू के सौतेले पिता से जन्मे मंसूर अली (मुस्लिम) और कमला कौल नेहरू (एक कश्मीरी पंडित)।


Q8: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के माता-पिता कौन हैं ?

Ans: जहांगीर फ़िरोज़ खान (फ़ारसी मुस्लिम) और इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू उर्फ ​​मामूना बेगम खान। इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू उर्फ ​​मामूना बेगम खान- w/o जहांगीर फिरोज खान (फारसी मुस्लिम), जिन्होंने बाद में मोहनदास करमचंद गांधी की सलाह पर अपना नाम बदलकर गांधी रख लिया। उनके दो बेटे राजीव खान (पिता फिरोज जहांगीर खान) और संजीव खान (नाम बाद में बदलकर राजीव गांधी व संजय गांधी हो गए) संजय के पिता भी फिरोज़ नही बताये जाते। 


Q9: क्या जवाहरलाल नेहरू (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री), मुहम्मद अली जिन्ना (पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री) और शेख अब्दुल्ला (कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री) एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं ?

Ans: हाँ

ऊपर बताए गए तीन लोगों की माताओं में एक ही पति मोतीलाल नेहरू थे। जिन्ना की मां मोतीलाल की चौथी पत्नी हैं। अब्दुल्ला मोतीलाल की 5 वीं पत्नी जो उनके घर की मेड थी के माध्यम से है। इसलिए दोनों के पिता एक ही थे। जबकि जवाहर लाल के पिता मोतीलाल जवाहर लाल के सौतेले पिता हैं। 


Q10: आपको ये सभी उत्तर कहां से मिले, जबकि मुझे इतिहास की पुस्तकों में ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है?

Ans: एम. ओ. मथाई (जवाहरलाल नेहरू के निजी सहायक) की जीवनी से।

द्वारा  एम.ओ. मथाई!!

           *बहुत कम लोगों को पता है कि इस परिवार के बारे में।"


आज देश को पहली बार पता चल रहा है कि कश्मीर वैली की population 53 लाख है। जम्मू रीजन की population 69 लाख है, और लद्दाख की population 5 लाख है।

कश्मीर का एरिया, राज्य के टोटल Area का 16%, जम्मू का Area 25%, बाकी  का  59% Area लद्दाख का है।

सोचने वाली बात ये है कि ना कश्मीर वैली एरिया के हिसाब से ज्यादा है, ना पोपुलेशन के हिसाब से, लेकिन नेहरू ने कश्मीर वैली को 47 सीट विधान सभा में दे दी, तथा जम्मू व लद्दाख को मिलाकर 43 सीट। 

मतलब अगर कोई जम्मू व लद्दाख की सारी सीट भी जीत ले, तब भी सत्ता नहीं पा सकता।

ऐसा घिनौना खेल देश  के साथ खेला गया ।🤔

1947 में बंटवारा नही, बल्कि जेहाद हुआ था...!!
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यह कैसा बंटवारा था...? 
जो भी हिन्दू अपना घर और जमीन पाकिस्तान मे छोड़कर हिन्दुस्तान आए…   उस पर तो मुसलमानों का कब्जा हुआ ही... साथ मे जो घर और जमीन मुसलमान हिन्दुस्तान मे छोड़कर पाकिस्तान गए…   उसे भी वक्फ बोर्ड के माध्यम से मुसलमानों को ही सौंप दिया गया...
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नेहरू, गांधी और कांग्रेस ने, ये कैसा न्याय किया था हिन्दुओं के साथ...?

एक तो मुसलमानों को बांग्लादेश और पाकिस्तान दे दिया…  दूसरे हिन्दुस्तान मे सेकुलरिज्म के नाम पर मुसलमानों को अल्पसंख्यक घोषित कर विशेष संरक्षण दे दिया...  ऊपर से दोनो देशों के विस्थापितों की छूटी हुई सारी जमीन जायदाद भी मुसलमानो के हवाले कर दी गई...

साथ में नेहरू ने कश्मीर का ऐसा नासूर दिया कि वहां से भी हिन्दुओं की धन संपत्ति और उनकी महिलाओं की इज्जत लूटकर उन्हें खदेड़ दिया गया...इतना सब होने और सहने के बाद भी, देश का सेकुलर व कायर हिन्दू, कांग्रेस को वोट देता है ?

देवी देवता

33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार। 

देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं.

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-

12 प्रकार हैँ

आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...!

8 प्रकार हे :-

वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :- 

रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

एवँ

दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी 


अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं। ।



श्री मद्-भगवत गीता

 "श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-


ॐ . किसको किसने सुनाई?

उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई। 


ॐ . कब सुनाई?

उ.- आज से  5700 साल पहले सुनाई।


ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?

उ.- रविवार के दिन।


ॐ. कोनसी तिथि को?

उ.- एकादशी 


ॐ. कहा सुनाई?

उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।


ॐ. कितनी देर में सुनाई?

उ.- लगभग 45 मिनट में


ॐ. क्यू सुनाई?

उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।


ॐ. कितने अध्याय है?

उ.- कुल 18 अध्याय


ॐ. कितने श्लोक है?

उ.- 700 श्लोक


ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?

उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। 


ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा 

और किन किन लोगो ने सुना?

उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने


ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?

उ.- भगवान सूर्यदेव को


ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?

उ.- उपनिषदों में


ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?

उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।


ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?

उ.- गीतोपनिषद


ॐ. गीता का सार क्या है?

उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना


ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?

उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574

अर्जुन ने- 85 

धृतराष्ट्र ने- 1

संजय ने- 40.

नई शिक्षा नीति 2020

 कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दे दी है।

शिक्षा नीति को 34 वर्षों के बाद बदल दिया गया है। नई शिक्षा नीति के बारे में उल्लेखनीय बातें इस प्रकार हैं:

5 साल के फंडामेंटल

• नर्सरी @ 4 साल

• जूनियर केजी @ 5 साल

• सीनियर केजी @ 6 साल

• Std 1st @ 7 साल

• Std 2nd @ 8 साल


3 साल की तैयारी

• Std 3rd @ 9 साल

• Std 4th @ 10 साल

• Std 5th @ 11 साल


9 साल मध्य

• Std 6th @ 12 साल

• Std 7th @ 13 साल

• Std 8th @ 14 साल


4 साल माध्यमिक

• Std 9th @ 15 साल

• Std SSC @ 16 साल

• Std FYJC @ 17 वर्ष

• STD SYJC @ 18 साल


जरुरी चीजें:

केवल 12 वीं कक्षा में बोर्ड होंगे।

कॉलेज की डिग्री के 4 साल।

10 वीं बोर्ड नहीं

M Phil भी बंद हो जाएगा।

(जेएनयू जैसे संस्थानों में, 45 से 50 वर्ष के छात्र कई वर्षों तक वहां रहते हैं और M Phil का पीछा करते हैं। इन सभी विवादित वामपंथी विचारकों को अब संस्थान से हटा दिया जाएगा)

अब 5 वीं तक के छात्रों को मातृभाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्रीय भाषा में ही पढ़ाया जाएगा। बाकी विषय, भले ही वे अंग्रेजी हों, विषय के रूप में पढ़ाए जाएंगे।

अब सिर्फ 12 वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा देनी है। जबकि पहले 10 वीं बोर्ड की परीक्षा देना अनिवार्य था, जो अब नहीं होगा।

परीक्षा 9 से 12 वीं कक्षा तक सेमेस्टर के रूप में होगी।

स्कूली शिक्षा 5 + 3 + 3 + 4 फॉर्मूला (ऊपर तालिका देखें) के तहत की जाएगी।

कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी यानी पहले साल ग्रेजुएशन, दूसरे साल डिप्लोमा, तीसरे साल में डिग्री दी जाएगी।

3-वर्ष की डिग्री उन छात्रों के लिए है, जिन्हें उच्च शिक्षा लेने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी। 4 साल की डिग्री करने वाले छात्र एक साल में एमए कर सकेंगे।

--- अब छात्रों को M Phil नहीं करना पड़ेगा। बल्कि MA के छात्र अब सीधे PhD कर सकेंगे।

छात्र बीच-बीच में अन्य कोर्स कर सकेंगे। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 2035 तक 50 प्रतिशत होगा। वहीं, नई शिक्षा नीति के तहत, यदि कोई छात्र किसी कोर्स के बीच में दूसरा कोर्स करना चाहता है, तो वह पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर दूसरा कोर्स कर सकता है।

उच्च शिक्षा में भी कई सुधार किए गए हैं। सुधारों में वर्गीकृत शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता आदि शामिल हैं। इसके अलावा, क्षेत्रीय भाषाओं में ई-पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। वर्चुअल लैब्स को विकसित किया जाएगा। एक राष्ट्रीय शैक्षिक वैज्ञानिक मंच (NETF) शुरू किया जाएगा। देश में 45 हजार कॉलेज हैं।

यूनिफॉर्म के नियम सभी सरकारी, निजी, डीम्ड संस्थानों के लिए होंगे।

इस नियम के अनुसार, नया शैक्षणिक सत्र शुरू किया जा सकता है और सभी छात्रों और अभिभावकों को इस संदेश को ध्यान से पढ़ने की आवश्यकता है।


Wednesday, 18 November 2020

विचारक नाथूराम

 महान देशभक्त राष्ट्र पुत्र महात्मा नाथूरामगोडसे को उनके बलिदान दिवस पर शौर्य पूर्ण श्रद्धांजलि

जन्म : 19 मई 1910 बारामती पुणे (महाराष्ट्र)

बलिदान : 15 नवंबर 1949 अंबाला जेल (पंजाब)

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महात्मा नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान 👇👇

कहा जाता है की इसे सुनकर अदालत में उपस्थित सभी लोगो की आँखे गीली हो गई थी और कई तो रोने लगे थे। एक जज महोदय ने अपनी टिपणी में लिखा था की यदि उस समय अदालत में उपस्थित लोगो को जज बनाया  जाता और उनसे फैंसला देने को कहा जाता तो निसंदेह वे प्रचंड बहुमत से नाथूराम के निर्दोष होने का निर्देश देते!

इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान जज खोसला से नाथूराम ने अपना पक्ष खुद पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी, जिसे जज ने स्वीकार कर लिया था l

नाथूराम जी ने अपने बयान में कहा👇👇

सम्मान ,कर्तव्य और अपने देश वासियों के प्रति प्यार कभी कभी हमें अहिंसा के सिद्धांत से हटने के लिए बाध्य कर देता है। में कभी यह नहीं मान सकता की किसी आक्रामक का सशस्त्र  प्रतिरोध करना कभी गलत या अन्याय पूर्ण भी हो सकता है।

प्रतिरोध करने और यदि संभव हो तो ऐसे शत्रु को बलपूर्वक वश में करना को मैं एक धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानता हूँ। मुसलमान अपनी मनमानी कर रहे थे, या तो कांग्रेस उनकी इच्छा के सामने आत्मसर्पण कर दे और उनकी सनक ,मनमानी और गंदे रवैये के स्वर में स्वर मिलाये अथवा उनके बिना काम चलाये वे अकेले ही प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति के निर्णायक थे।

महात्मा गाँधी अपने लिए जूरी और जज दोनों थे .गाँधी जी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदी भाषा के सौंदर्य और सुन्दरता के साथ बलात्कार किया। गाँधी जी के सारे प्रयोग केवल और केवल हिन्दुओ की कीमत पर किये जाते थे। जो कांग्रेस अपनी देश भक्ति और समाज वाद का दंभ भरा करती थी। उसी ने गुप्त रूप से बंदूक की नोक पर पाकिस्तान को स्वीकार कर लिया और जिन्ना के सामने नीचता से आत्मसमर्पण कर दिया।

मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण भारत माता के टुकड़े कर दिए गये और 15 अगस्त 1947 के बाद देश का एक तिहाई भाग हमारे लिए ही विदेशी भूमि बन गई। नेहरु तथा उनकी भीड़ की स्वीकारोक्ति के साथ ही एक धर्म के आधार पर अलग राज्य बना दिया गया .इसी को वे बलिदानों द्वारा जीती गई स्वतंत्रता कहते है। और, किसका बलिदान ?

जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओ ने गाँधी जी के सहमती से इस देश को काट डाला ,जिसे हम पूजा की वस्तु मानते है , तो मेरा मस्तिष्क भयंकर क्रोध से भर गया .मैं साहस पूर्वक कहता हूँ की गाँधी अपने कर्तव्य में असफल हो गए। उन्होंने स्वयं को पाकिस्तान का पिता होना सिद्ध किया।

मैं कहता हूँ की मैंने गोलियां एक ऐसे व्यक्ति पर चलाईं  ,जिसकी नीतियों और कार्यो से करोड़ों हिन्दुओं को केवल बर्बादी और विनाश ही मिला। ऐसी कोई क़ानूनी प्रक्रिया नहीं थी जिसके द्वारा उस अपराधी को सजा दिलाई जा सके, इसीलिए मैंने इस घातक रास्ते का अनुसरण किया।

मैं अपने लिए माफ़ी की गुजारिश नहीं करूँगा ,जो मैंने किया उस पर मुझे गर्व है। मुझे कोई संदेह नहीं है की इतिहास के इमानदार लेखक मेरे कार्य का वजन तोल कर भविष्य में किसी दिन इसका सही मूल्यांकन करेंगे। जब तक सिन्धु नदी भारत के ध्वज के नीचे से ना बहे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन मत करना।

ऐसे देशभक्त क्रांतिकारी तथा प्रखर विचारक को मैं उनके चरणों में शत शत नमन करता हूं 🙏🏻🙏🏻

महात्मा नाथूराम गोडसे अमर रहे 🙏🏻🙏🏻🇮🇳🇮🇳

एक दिन आएगा जब गांधी की जगह गोडसे की मूर्तियां लगेंगी क्योंकि गोडसे सही साबित हो चुके हैं और मुसलमान बार-बार गांधी को गलत साबित कर देता है। 

- अभी जब ओवैसी ने बिहार के सीमांचल में 5 सीटें जीत लीं तो मुसलमानों ने एक बार फिर गांधी को गलत साबित कर दिया। 

- जब भारत बंटा तो बलूचिस्तान से बंगाल तक 9 से 10 करोड़ मुसलमान रहे होंगे... मुसलमानों ने अपने अलग देश के लिए रोना धोना मचाया और जंगी जुनून पैदा किया... हिंदुओं का कत्लेआम किया तो गांधी ने देश का बंटवारा स्वीकार कर लिया ।

- तब कांग्रेस में मौजूद सरदार पटेल लॉबी ने बिलकुल साफ कहा । अंबेडकर ने भी कहा कि सुनियोजित बंटवारा करो और सारे मुसमलानों को देश से बाहर कर दो... पाकिस्तान भेज दो ताकी सांप्रदायिकता की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए लेकिन गांधी नहीं माना और यहां भी मुसलमानों को रहने दिया। 

- अब टूटे फूटे भारत में 9 करोड नहीं 25 करोड़ मुसलमान हैं और वो (अधिकांशत:) पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं  या फिर उसका समर्थन करते हैं या मुखर होकर विरोध नहीं करते हैं । 

- यानी कुरान शरीफ के अनुयायियों ने बार-बार गांधी के पूरे अहिंसा, सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक समरसता के सिद्धांतों को खारिज कर दिया है। 

- अब अगर ओवैसी ये कहता है कि हम तुमको 15 मिनट में खत्म कर देंगे... अगर कश्मीर से किसी मौलाना की आवाज उठती है कि अब देश में इतने मुसमलान हो गए हैं कि फिर से बंटवारा कर सकते हैं तो बार-बार गोडसे सही साबित होते हैं और गांधी गलत साबित होता है। 

- मुसलमानों ने उस वक्त भी गांधी को गलत साबित कर दिया जब दिल्ली में छत से सुरक्षाबलों पर तेजाब की बाल्टियां उड़ेल दी गईं थीं । 

- मुसलमानों ने उस वक्त भी गांधी को गलत साबित कर दिया जब शाहीनबाग में जिन्ना के समर्थन में नारे लगे । शरजील इमाम जैसा अलगाववादी विचारक भी गांधी को गलत साबित करता है । 

- अभी जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ईशनिंदा करने वाले की हत्या करने के नारे लगे... तब भी मुसलमानों ने गांधी को गलत साबित कर दिया था। 

- अभी जब वल्लभगढ़ में निकिता तोमर की सरेआम हत्या कर दी गई... तो भी गांधी ही गलत साबित हुआ। 

- गांधी बार बार गलत साबित होता है इसीलिए कहता हूं कि लोगों के दिलों से गांधी की प्रतिमा उखड़ चुकी है अब देखना ये है कि गली मोहल्लों चौराहों में और कितने दिन ये मूर्तियां खड़ी रहती हैं ? 


- इतिहास गोडसे का पुनर्मूल्यांकन करेगा

🙏साभार-दिलीप पाण्डेय  जी।। 

साल 2010...                                                

मैं पुणे गया हुआ था...                                       

स्व नाथूराम गोडसे जी का घर भी गया...

वहाँ मेरी मुलाकात नाथूराम गोडसे जी के छोटे भाई गोपाल गोडसे के सुपुत्र श्री नारायण गोडसे और उनकी धर्मपत्नी से हुई...  

उन्होंने मुझे  बहुत प्यार और सम्मान से घर में बिठाया..  नाश्ता दिया और काफी सारी इधर उधर की बातें की...      मैं यह जानना चाहता था...      

कि गाँधी की हत्या के बाद  उनके परिवार पर क्या गुजरा...

उन्होंने बताया जिस समय महात्मा गाँधी की हत्या हुई...उस समय उनके पिता गोपाल गोडसे इंडियन आर्मी में सेवारत थे... और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वह ईरान और इराक में भी अंग्रेजी फौज की ओर से युद्ध में भाग लिए थे... गाँधी की हत्या के तुरंत बाद...नाथूराम गोडसे और नाना आप्टे को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया...         और गोपाल गोडसे को पुणे से गिरफ्तार किया गया...  नि:संदेह गाँधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी...               और नाथूराम गोडसे और नाना आप्टे ने घटनास्थल से भागने की कोई कोशिश नहीं की थी...लेकिन गोपाल गोडसे पुणे में थे... उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं था...पर उन्हें भी इस हत्याकांड के लिए 18 साल की सजा दी गई... नाथूराम गोडसे की एक इंश्योरेंस थी ₹5000 की...  जिसमें गोपाल गोडसे की धर्मपत्नी सिंधुताई गोडसे नॉमिनी थी...  क्योंकि नाथूराम गोडसे अविवाहित थे... तो उन्होंने अपने छोटे भाई की धर्मपत्नी को नॉमिनी बनाया था...इसी को आधार बनाते हुए काँग्रेस सरकार ने गोपाल गोडसे को 18 साल तक जेल में रखा... गाँधी वध के तुरंत बाद पुणे और उसके आसपास के इलाकों में चितपावन ब्राह्मणों की सामूहिक हत्याकांड शुरू हो गई...सिंधुताई गोडसे अपने तीनों छोटे बच्चों को लेकर जान बचाने के लिए इधर उधर भागती रही...ऐसे वक्त में नाते रिश्तेदारों ने भी उनसे हाथ खींच लिया...राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने गाँधी हत्या एक जघन्य अपराध है...कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया...उनके घर को जलाकर खाक कर दिया गया...जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने सड़क के किनारे लोहार का काम शुरू किया... स्वर्गीय नारायण गोडसे ने अपना हाथ मेरे हाथ में दिया... और दबाने को कहा... उनका हाथ पत्थर के माफिक कठोर था...  उन्होंने कहा 12 साल की उम्र से वह लोहे पीट रहे थे अपनी माता जी के साथ...बहनें बड़ी होती जा रही थी...  कहीं भी रिश्ते की बात होने से काँग्रेसी नेता लड़के वाले को भड़का देते थे...  और विवाह नहीं होने देते थे... उनकी माता जी के साथ अभद्र व्यवहार सरेआम होता था..2 बार तो ऐसा हुआ जब थाने से लड़के वाले को विवाह ना करने को कहा गया...  और विवाह करने की स्थिति में अंजाम भुगतने की धमकी दी गई...आखिर वीर सावरकर ने अपने छोटे भाई के बेटे से उनकी एक बहन का विवाह करवाया...जो बाद में हिमानी सावरकर के नाम से अभिनव भारत की प्रेसिडेंट हुई...आपको क्या लगता है कितने ब्राह्मणों की हत्या की गई..मैंने उनसे पूछा... 

उनकी आँखों में आँसू आ गए...और उन्होंने कहा दिन तो किसी तरह गुजर जाता था... लेकिन रात होते ही चुन-चुन कर चितपावन ब्राह्मणों के घर पर पेट्रोल से हमला होती थी...और घर और उसमें रहने वाले केा साथ जलाकर राख कर दिया जाता था... ना कोई मामला दर्ज किया जाता था... ना पड़ोस के लोग काँग्रेसियों के डर से मदद कर पाते थे... मदद करने वाले को अंजाम भुगतने की धमकी दी जाती थी... और कुछ जगह पर तो मदद करने वालों की सार्वजनिक हत्या भी की गई... ऐसी हालत में उनकी माताजी अपने दोनों छोटे बच्चों को लेकर गाँव चले गए... 

और एक गाँव से दूसरे गाँव तक भटकते रहे...लोगों ने सलाह दिया कि वह अपने को नाथूराम का संबंधी ना बताएं...

अन्यथा जान से मारे जाएंगे... किसी तरह से दंगा समाप्त हुआ...लगभग 8000 से अधिक चितपावन ब्राह्मणों की सरेआम हत्या के बाद...गाँधी वध का बदला 8000 निर्दोष ब्राह्मणों की हत्या करके लिया गया...उन्होंने एक लंबी साँस लिया ...  एक घूँट पानी पिया... उनकी आँखों में आँसू थे... और आगे कहना शुरू किया... जीवन कठिन था....

दो वक्त का भोजन असंभव... माताजी ने लोहार का काम शुरू किया... सड़क के किनारे बैठ कर लोहे के छोटे-मोटे औजार बना कर बेचना शुरू किया... 1962 के युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी सेवाएं केंद्र सरकार को देने के लिए पत्र भी लिखा... जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला... 1965 के युद्ध के दौरान भी उन्होंने अपनी सेवाएं केंद्र सरकार को देने के लिए पत्र लिखा जिसका कोई जवाब नहीं मिला...स्वर्गीय नाथूराम गोडसे के फाँसी के बाद उनके परिवार ने उनके मृत शरीर की माँग की थी... ताकि वे हिंदू रीति रिवाज के अनुसार उनका अंतिम क्रिया कर्म कर सकें...  लेकिन सरकार ने उसकी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया...अंबाला जेल में ही उन दोनों को फाँसी देकर...

उनकी लाश भी जला दी गई...अस्थियाँ घग्गर नदी में फेंक दी गई... किसी तरह से उनके परिवार को स्वर्गीय नाथूराम गोडसे और स्वर्गीय नाना आप्टे की अस्थियाँ मिली...जिसको उन्होंने अपने घर के एक कमरे में रखा है...

 क्योंकि नाथूराम गोडसे की अंतिम इच्छा थी...उनकी अस्थियाँ सिंधु नदी में बहाया जाय...जब सिंधु नदी हिंदुस्तान के झंडे तले बह रहा हो...चाहे इसके लिए कितना भी समय लग जाए... कितनी भी पीढ़ियाँ गुजर जाए... नाथूराम गोडसे जी का कहना था... यहूदियों को 1600 साल लगा इसराइल को पाने में... हमें भी 100 - 200 साल लग सकते हैं...लेकिन हमें इंतजार और संघर्ष करना होगा... नाथूराम गोडसे ने एक बात कही थी... 

बाकी क्रांतिकारियों को और उनके परिवार वाले को... 

सम्मान मिलेगा...

धन भी मिलेगी... 

और लोग उनसे जुड़ने में गर्व महसूस करेंगे... 

वे देशभक्त कहलाए जाएंगे...  लेकिन मेरे परिवार को ना सम्मान मिलेगा... ना धन मिलेगा... लोग भी उनसे जुड़ने से परहेज करेंगे...उन्हें देशद्रोही कहा जाएगा... अंग्रेजों के समय में तो सिर्फ क्रांतिकारी को फाँसी दी जाती थी... 

और परिवार वाले सुरक्षित होते थे... मेरे मरने के 100 साल के बाद...लोगों को मेरा बलिदान समझ में आएगा...  

और गाँधी का मुखौटा उतर चुका होगा...लेकिन 100 साल तक मेरे परिवार को भीषण कष्ट सहने होंगे...आजादी के बाद ना सिर्फ नाथूराम गोडसे और नाना आप्टे को फाँसी दी गई... बल्कि उनके पूरे परिवार को तबाह और बर्बाद कर दिया गया... और साथ में तबाह हुए 8000 निर्दोष परिवार... गाँधी की अहिंसा की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी निर्दोष ब्राह्मणों को...नाथूराम गोडसे और नाना आप्टे की अस्थियों को मैंने प्रणाम किया... उनके साथ भोजन किया और मैंने चलने का इजाजत माँगी... वह मुझे छोड़ने गेट तक आए... मैं उनके चरण स्पर्श करने के लिए झुका...लोहे जैसे हाथों से उन्होंने मुझे उठाया... उनकी आँखों में आँसू थे..मेरी भी आँखें नम थी...

कहने का कुछ नहीं था... फिर भी उन्होंने कहा फिर आना... और घर पर ही रुकना...मैंने भी हाँ में सिर हिलाया...

#साभार- #यशवंत_पाण्डेय